विधायक, सांसद आपके गांव आकर पूछेंगे... बता तेरी रजा क्या है ?
दशकों बाद हंगामा है बरपा किसी गांव में. पिछले पोस्ट में हमनें जिस बात की आशंका की थी आखिरकार वही हुआ. बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र के ढंगा गांव में सड़क शिलान्यास होने के दो महीने बाद भी काम नही शुरू होने से आक्रोशित ग्रामीणों व कुछ युवाओं ने शिलापट्ट को टुकड़ों में बांट दिया उसी तरह जिस तरह क्षेत्र की जनता के भावनाओं को दशकों से इस क्षेत्र के प्रतिनिधि टुकड़ों में बांटते रहे. रविवार को जब मूसलाधार बारिश हो रही थी तो ढंगा गांव का मुख्य सड़क पानी से लबालब भरा हुआ था. बारिश के दिनों में इस गांव के हालातों का प्रत्यक्षदर्शी में खुद भी रहा हूं. इस दौरान अचरज सड़क पर पानी जमा होने से नही बल्कि इस बात से हुआ कि थोड़ी सी बारिश होने के बाद ही गांव के मुख्य सरकारी स्कूल जहां सैकड़ों नौनिहाल भविष्य बनाने कर लिए जाता हैं उसका मुख्य द्वार बारिश होते ही 3-4 फ़ीट पानी में डूब जाता है. जिसके बाद बच्चों को अपना भविष्य छोड़कर जिंदगी बचाने की जुगत में लगना पड़ता है. आप सोच सकते हैं कि चौथी-पांचवी कक्षाओं के बच्चों की लंबाई 4-5 फ़ीट से अधिक नही होती है. ऐसे में बच्चों को 3 से 4 फ़ीट तक पानी हेलकर स्कूल जाना-आना पड़ता है. अगर ऐसे में उस गांव के ग्रामीणों में ज्वाला धधकी है तो जायज धधकी है. अगर यह धधक ढंगा जैसे सभी गांवों में धधकने लगे तो वह दिन दूर नही जब विधायक, सांसद आपके गांव आकर पूछेंगे... बता तेरी रजा क्या है.
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