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वो बचपन भी क्या सुहाना था



वो बचपन भी क्या सुहाना था
जहाँ खुशियों का ढ़ेर ख़जाना था ।

सोते उठते माँ का प्यार से सर पे हाथ सहलाना था
फिकर न होती थी सुबह की ना शाम का ठिकाना था 
मुट्ठी में अपने जमाना था 
वो बचपन भी क्या सुहाना था...

खुला आसमां में चहचहाती चिड़ियों के संग 
उड़ता अपना पतंग भी रोजाना था 
चाहत चाँद को पाने की दिल तितली का दीवाना था 
वो बचपन भी क्या सुहाना था...

दादी माँ की कहानियों थी परियों का खूब फ़साना था
ना किसी बात की फिकर दिल हर गम से बेगाना था
लबों पे हर वक़्त हसी जिसका ना कोई ठिकाना था
वो बचपन भी क्या सुहाना था...

स्कुल में मस्ती कागज की कश्ती पानी में खूब चलाना था 
दोस्तों के नाम बदल कर सबको खूब चिढ़ाना था
बेमतलब की शरारतों से अपने सबको मज़े कराना था 
वो बचपन भी क्या सुहाना था...

घर आके माँ को स्कुल के किस्से सुनाना था
पढाई तो अपनी होती न थी 
पर खेलने टाइम पर जाना था 
गम की कोई जगह ना थी जख्मों का खूब बहाना था
ना गिला किसी से ना शिकवा किसी से
ऐसा अपना याराना था 
वो बचपन भी क्या सुहाना था...

आजुक जनमल धिया पुता सब

आजुक/आगुक जनमल धिया पुता सब
केहन दिन देखाबय या..
ज्यों किछु निजुगुत/हिनका बात कही ता 
दिस और डेट सुनाबय या/इंग्लिश बाईज चिढाबय या..

आजुक/आगुक जनमल धिया पुता सब
केहन दिन देखाबय या..

पूजा पाठ ने कियो करय या Dj Band बजाबय या
मंत्र तंत्र के बात ने करू 
इंग्लिश रैप सुनाबय या...

आजुक/आगुक जनमल धिया पुता सब
केहन दिन देखाबय या..

बाप करय छय खेती पथारी बेटा मौज उड़ाबय या
भइर दिन रहय या/छैथ फेसबुक पर 
छौड़ी खूब घुमाबय या...

आजुक/आगुक जनमल धिया पुता सब
केहन दिन देखाबय या..

आधा माथक केस कटा/छिला क ओकरा स्टाइल बताबय या
बाप के डैडी माँए के मम्मी
संस्कार के अपन लजाबय या...

आजुक/आगुक जनमल धिया पुता सब
केहन दिन देखाबय या..

हीरो हौंडाक गेल जमाना पल्सर पर रौब देखाबय या
सैमसंग नोकियाक बात ने करू
i phone के टेटियाबय या..

आजुक/आगुक जनमल धिया पुता सब
केहन दिन देखाबय या..

देख जमाना अजगुत होय या मिथिला/मैथिलि के किया भुलाबय या
बात में बात इंग्लिश विन्ग्लिश/बात बात में इंग्लिश बाईज क
इज्ज़त के वाट लगाबय या

आजुक/आगुक जनमल धिया पुता सब
केहन दिन देखाबय या..

नई दुनिया बसाने के चक्कर में, वो दुनिया छोड़ आए हैं

नई दुनिया बसाने के चक्कर में, वो दुनिया छोड़ आए हैं
तुम्हारे पास जितना है हम उतना छोड़ आए हैं।

सभी त्योहार मिलजुल कर मनाते थे वहाँ जब थे
नई दुनिया बसा लेने की इक कमज़ोर चाहत में,
दिवाली छोड़ आए हैं दशहरा छोड़ आए हैं।

गुजरते वक़्त बाज़ारों के अब भी याद आता है,
पुराने घर की दहलीज़ों को सूना छोड़ आए हैं ।
पटाखों की वो लड़ियाँ माचिस की तिल्ली छोड़ आए हैं।

भाई की कलाई पर बहना ने जो एक डोर बांधा था,
वो राखी छोड़ आए हैं वो रिश्ता छोड़ आए हैं।

पकाकर रोटियाँ रखती थी माँ जिसमें सलीक़े से,
घर से निकलते वक़्त वो रोटी की डलिया छोड़ आए हैं ।

यक़ीं आता नहीं, लगता है कच्ची नींद में हूँ शायद,
की घर की शाम गावं का सवेरा क्यू छोड़ आए हैं ।

कहानी का ये हिस्सा आजतक सब से छुपाया हमने,
कि एक रोटी की ख़ातिर सबकुछ छोड़ आए हैं।
नई दुनिया बसाने के चक्कर में, वो दुनिया छोड़ आए हैं।

विधायक, सांसद आपके गांव आकर पूछेंगे... बता तेरी रजा क्या है ?

दशकों बाद हंगामा है बरपा किसी गांव में. पिछले पोस्ट में हमनें जिस बात की आशंका की थी आखिरकार वही हुआ. बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र के ढंगा गांव में सड़क शिलान्यास होने के दो महीने बाद भी काम नही शुरू होने से आक्रोशित ग्रामीणों व कुछ युवाओं ने शिलापट्ट को टुकड़ों में बांट दिया उसी तरह जिस तरह क्षेत्र की जनता के भावनाओं को दशकों से इस क्षेत्र के प्रतिनिधि टुकड़ों में बांटते रहे. रविवार को जब मूसलाधार बारिश हो रही थी तो ढंगा गांव का मुख्य सड़क पानी से लबालब भरा हुआ था. बारिश के दिनों में इस गांव के हालातों का प्रत्यक्षदर्शी में खुद भी रहा हूं. इस दौरान अचरज सड़क पर पानी जमा होने से नही बल्कि इस बात से हुआ कि थोड़ी सी बारिश होने के बाद ही गांव के मुख्य सरकारी स्कूल जहां सैकड़ों नौनिहाल भविष्य बनाने कर लिए जाता हैं उसका मुख्य द्वार बारिश होते ही 3-4 फ़ीट पानी में डूब जाता है. जिसके बाद बच्चों को अपना भविष्य छोड़कर जिंदगी बचाने की जुगत में लगना पड़ता है. आप सोच सकते हैं कि चौथी-पांचवी कक्षाओं के बच्चों की लंबाई 4-5 फ़ीट से अधिक नही होती है. ऐसे में बच्चों को 3 से 4 फ़ीट तक पानी हेलकर स्कूल जाना-आना पड़ता है. अगर ऐसे में उस गांव के ग्रामीणों में ज्वाला धधकी है तो जायज धधकी है. अगर यह धधक ढंगा जैसे सभी गांवों में धधकने लगे तो वह दिन दूर नही जब विधायक, सांसद आपके गांव आकर पूछेंगे... बता तेरी रजा क्या है. 

दशकों बाद हंगामा बरपा था मेरे गांव में



दशकों बाद हंगामा बरपा था मेरे गांव में
सड़के सुनसान, हर दुकान था मेरे गांव में
लोग कहते थे यहां मतलब नही किसी को किसी से
मैनें जिंदा लोगों को सड़कों पर देखा था अपने गांव में

काश में तुझमें मर जाउं

























तुम राह दिखाना वापस मुझको
गर राह भटक में पथ से जाउं
तुम पास बुला लेना मुझकोगर 
दूर कहीं मैं चला जाउं
या काश में तुझमें मर जाउं
मरके अमर में हो जाउं

गर आंखें खो जाए जिस दिन
ये नजरें देख ना पाए तुमको
तुम जुल्फ़ें उस रोज खुली रखना
जब तक खुशबू से पहचान तुझे में ना जाउं
या काश में तुझमें मर जाउं
मरके अमर में हो जाउं

भर लेना मुझको बांहों में
जिस दिन देर तलक में सो जाउ
तुम चूमना मेरे होठों को 
जब बोल ना तुझसे कुछ पाउं
या काश में तुझमें मर जाउं
मरके अमर में हो जाउं

हाथों में हाथ ना रखना तुम
शायद फिर से पागल ना हो जाउं
दिल पर हाथ ना रखना तुम
कहीं वापस जिंदा ना हो जाउं
या काश में तुझमें मर जाउं
मरके अमर में हो जाउं

- बीजे बिकास (2018)

विधायक के मूर्छित समर्थकों को मिली 'संजीवनी' का पोस्टमार्टम


नबका पुरनका भक्तों को सादर प्रणाम...
बेनीपट्टी की राजनीति शादी में नास्ता के पैकेट को लेकर इन दिनों अपने रंग में है. सोमवार को कांग्रेस पार्टी ऑफिस में हुए शादी समारोह में हंगामे के बाद अहले सुबह प्रेस कांफ्रेस कर रही बेनीपट्टी विधायक भावना झा के घेराव के साथ रणक्षेत्र बना पार्टी कार्यालय ओर भावना विरोधी नारों ने ऐसा तूल पकड़ा है कि पटना सदाकत आश्रम से लेकर दिल्ली दरबार मे पंचायत लगी हुई है. आरोप प्रत्यारोप के दौर में कटघरे में आरोपी के किरदार में बेनीपट्टी की विधायक भावना झा है. पक्ष में महागठबंधन के घटक दल कांग्रेस जदयू राजद हैं तो विपक्ष में बीजेपी. मुद्दई मुदालाह का जजमेंट हो रहा है. लेकिन मुद्दई मुदालाह के बाद जनता अपना पक्ष सुनाने के लिए अकबका के मुंह ताक रही है. लेकिन जनता के गवाही यानी पक्ष के लिए कोई मर्दाबा हथौड़ी लेकर आर्डर-आर्डर कर ही नही रहा है. ऐसे में स्थिति में फैसला पंचयती के माध्यम से होगा.

गाम-समाज के लोगों व प्रत्यक्षदर्शियों के साथ पंचयती शुरू हुआ. इस झोल झमेला में सरपंच के बामा हाथ पढ़ुआ कक्का का कहना है कि सब बुड़बक है. शादी था ककरो ओर का. शादी धूम धड़क्का से सम्पन्न भी हो गया और झाईल मृदंग कियो और पीट रहा है. 3 दिन से इतना झाईल मृदंग पीटा है इ सब की कान में सुलवाई उखाड़ दिया है. आज भोरे-भोर बम्मई से जेठका बेटा फोन किया था. जून में उसका बियाह है. उ बोला कि बाबू हम गाम में बियाह नही करेंगे. टीभी पर देखे है कि गाम में बीच बियाह में हुड़दंग मच जाता है. नास्ता पैकेट का लूट्टीस हो जाता है. इ सब देख के टेंसन में है. लेकिन हम यह कहके भरोस दिए है की सत्तर के जगह एक सौ पैकेट नास्ता का व्यवस्था करेंगे समधी जी. लेकिन तोहर बियाह गामे में होगा.









पंचयती को आगे बढ़ाते हुए पंच सतहत्तर पाठक बताते है कि ये जो घटना घटित हुआ है वह गलत है. जिस तरह की बात सुनने में आ रही है. ओर उसमें तनिक भी सच्चाई है तो आरोपी को पाप लगा है. यह पाप करने के बाद द्रोही को गंगा स्न्नान का योग बनता है. 

आगे फौजी चचा निलंबित मिश्रा थुत्थुन में तमाकू गुलठियाते हुए कहते है कि आरोपी को यह गलती लाबादुआ में माफ कर दिया जाय. तभिये पंचयती के लेखापाल विडंबीत झा टपाक से बोले कि लाबादुआ माफी का बैलेंस इंसाफिसिएंट है. बस हादसा में 27 मौत के बाद सेल्फी वला मैटर में वो लाबादुआ माफी इस्तेमाल किया जा चुका है. इसके बजाय सभी अपमानित बाराती ओर सराती को बुलाकर आरोपी पर आरोप सिद्ध होने पर कपालभाती कराया जाय. इस पर आग बबूला होते हुए टहंकार के साथ खुरचन यादव कहते है कि जब बेनीपट्टी के पूर्व बीजेपी विधायक व विधान पार्षद विनोद नारायण झा अग्नि पीड़ित के बीच चुनावी कलेंडर बांटे था. उस समय विनोद नारायण झा से कपालभाती क्यों नही कराया गया. बेवफा वला पंचयती को हम स्वीकार नही करेंगे. 

पंचों के दलीलों से अचरज में सबका मुंह निघार रहे सरपंच लेनीदेनी मिश्र जी के दायां हाथ बिसखोपड़ी यादव कहते है कि समाज की बेटी की शादी में एक महिला विधायक जो कि खुद को भी बेनीपट्टी की बेटी बहन बताती है, वही शादी समारोह में विघ्न-बाधा डालने का प्रयास करे तो इस से बड़ी दुःखद घटना कोई नही हो सकती है. अगर पंचो के दलीलों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाने की बात की जाय तो पंचायत इस फैसले पर पंहुचती है. हमारे सरपंच लेनीदेनी मिश्र अगली बार विधानसभा का चुनाव खुद लड़ेंगे ओर उनका चुनाव चिन्ह शादी का पंडाल व उसमें नास्ता कर रहे बाराती होंगे. चुनावी वादों में उनका पहला घोषणा है कि वह किसी के शादी में होलो-लोलो नही करेंगे. ना ही नास्ता पैकेट के लिए मार करेंगे.

जनता बुड़बक बनकर सरपंच साहेब के दरबज्जा से लौट गई. लेकिन अभी तक भी जनता खुद के जजमेंट के लिए औउना रही है. पंचयती के बाद अखबार में यह छपा की लड़की के पिता ने अज्ञात जगह पर प्रेस कॉन्फ्रेंस किया है. जिसमें आरोपी को आरोप मुक्त कहते हुए इसे बीजेपी का साजिश बताया है. जिसके बाद विधायक के मूर्छित समर्थकों को मानो संजीवनी मिल गयी हो. समर्थकों द्वारा पेपर कटिंग को करेजा में साटकर जहां-तहां चौक-चौराहा, फेसबुक, व्हाट्स एप्प पर ढ़ोल-नगाड़ा बजाकर लड्डू-बताशा बांटा गया. लेकिन दूसरी तरफ लड़की के पिता पर फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप्प और चौक चौराहा पर लड़की के परिजन के साथ शादी समारोह के घटना के दिन से स्टैंड करने वाले समाज के लोग खौउझा/बौखला गए. सबका कहना था कि लड़की का पिता हम सबको दागी बना दिया. जिसके बाद से सामूहिक रूप से सब लड़की के पिता को होलो-लोलो कर रहे है. जिस पर सुनी सुनाई बातों के अनुसार लड़की के पिता बताते है कि हमने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस किया ही नही है. हमको कहीं बुलाया गया था, ओर अकेले आने के लिए बोला गया था. हम गए भी. लेकिन इसी बीच फुलटॉस गेंद पर खेल खिलाड़ी खेल गया. हम कुर्सी पर बैठे थे मुंह पर फ़्लैश बरा और मेरा फ़ोटो खिंच लिया गया. इतना कुछ होने के बाद भी हमको यह बात की जानकारी नही थी कि हमको बरगला लिया जाएगा. ना ही हमनें स्वीकृति से फ़ोटो खिंचवाया और ना ही कोई ऐसा बयान दिया है जिससे में उस समाज के नज़र में नीचा दिखूं जो हमारे सुख दुःख में साथ हैं. हमने उस जगह पर सिर्फ इतना कहा है कि उक्त घटना मेरे सामने नही घटी. जिसके कारण हो-हंगामे की जानकारी हमें नही है. जबकि घटना स्थल पर मेरे अलावे सारे परिजन मौजूद थे. जिनके सामने घटना घटी है. इस बात को लपेट-सपेट के अखबार में तोड़-मरोड़ दिया गया है. यह साजिश है हमें समाज के नज़र में नीचे गिराने की. समाज के साथ हम है, जो गलत है वो गलत है. इसमें कोई राजनीति रोटी सेंक रहा है तो उसका भला नही होगा. भगवान जरूर उसका होलो-लोलो कर देंगे.


सरपंच साहेब अगली पंचयती सुस्ताने के बाद करेंगे... तब तक आप लोग इस प्रकरण से उबरते हुए सरपंच साहेब लेनीदेनी मिश्र के चुनाव लड़ने की तैयारी पर ध्यान दें. और हां अभी अभी पंच पढ़ुआ कक्का ने हिम्मत करते हुए बताया कि जून में उनका जेठका बेटा का बियाह है. ओर यह बियाह गामे में होगा. कोई बियाह में होलो-लोलो करेगा तो गर्दा छोड़ा देंगे, और नास्ता का पैकेट भी नही देंगे. जिसके बाद से बाराती और सराती में खुशी की लहर दौड़ गयी है.

#अविश्वस्त_सूत्र लेखन Bj Bikash द्वारा